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विजय हजारे ट्रॉफी CricIndiaNow
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मैच से पहले आया फोन- नहीं रहे दादा… आंसू पोंछते हुए चैंप ने जड़ी सेंचुरी

तमिलनाडु के उभरते ऑलराउंडर बी अपराजित गेम की तरफ डेडिकेशन की मिसाल पेश कर रहे हैं। विजय हजारे ट्रॉफी में अपनी टीम को फाइनल तक पहुंचाने में उनका रोल अहम रहा। टूर्नामेंट के ग्रुप मैच के दौरान उनके दादाजी का निधन हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी टीम के लिए 100 परसेंट परफॉर्मेंस दिया। CricIndiaNow अपने रीडर्स को इसी स्टार के बारे में बता रहा है।

विजय हजारे ट्रॉफी – बैटिंग में टॉप पर हैं अपराजित

विजय हजारे ट्रॉफी 2019 में अपराजित ने बैट से बेहतरीन परफॉर्म किया है। उन्होंने 12 मैचों में 66.44 के एवरेज से 598 रन बनाए जिसमें 1 सेंचुरी और 6 फिफ्टी शामिल रहे। कर्नाटक के खिलाफ फाइनल में भी उन्होंने 66 रन बनाए। उनकी टीम के पहले दो विकेट महज 24 रन के स्कोर पर गिर गए थे। उन्होंने ओपनर अभिनव मुकुंद के साथ 154 रन की पार्टनरशिप कर टीम को 252 के स्कोर तक पहुंचाया। 

बॉल से भी इफेक्टिव

अपराजित ने विजय हजारे ट्रॉफी में बॉल से भी कॉन्ट्रिब्यूट किया है। उन्होंने टूर्नामेंट में 19.45 के एवरेज से 11 विकेट लिए। उनका बेस्ट परफॉर्मेंस 4/30 का रहा जो कि उन्होंने रेलवे के खिलाफ दिया था।

अंदर से दुखी थे, फिर भी दिया विनिंग परफॉर्मेंस

मौका था रेलवे के खिलाफ ग्रुप सी मुकाबले का। 9 अक्टूबर को जयपुर में मैच था। 8 अक्टूबर की शाम अपराजित को खबर मिली कि उनके दादाजी का निधन हो गया है। वे चाहते तो उसी वक्त अपने घर लौट सकते थे। लेकिन उन्होंने टीम के साथ रहने का कठिन फैसला लिया। 

अगले दिन रेलवे की टीम ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग चुनी। मैच के 9वें ओवर में अपराजित ने ओपनर देवधर को क्लीन बोल्ड कर दिया। उस मैच में उन्होंने कुल 30 रन देकर 4 विकेट झटके। रेलवे की टीम ने 201 रन का टार्गेट दिया।

लगातार ओवरों में दो विकेट गिरने से टीम मुश्किल में थी। 4.4 ओवरों में कुल 17 रन जुड़े थे और दोनों ओपनर पवेलियन लौट गए थे। अपराजित ने बैट से मोर्चा संभाला। उन्होंने वी शंकर के साथ 186 रन की नाबाद साझेदारी की। उन्होंने 7 चौकों और 1 छक्के से सजी 111 रन की पारी खेली। अपने ऑलराउंड परफॉर्मेंस के लिए वे प्लेयर ऑफ द मैच चुने गए।

विराट कोहली ने भी किया था ऐसा

virat kohli with father

अपराजित का साहस विराट कोहली की याद दिलाता है। करियर की शुरुआत में एक रणजी मैच के दौरान उन्होंने अपना डेडिकेशन दिखाया था। तब मैच के दौरान उनके पिता का निधन हुआ था। उस मैच में उन्होंने 90 रन की पारी खेली थी। उस पारी की मदद से दिल्ली ने कर्नाटक के खिलाफ मैच बचाया था। 

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